Ad

सोलर पैनल

उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 में यू.पी. के किसानों को क्या मिला ?

उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 में यू.पी. के किसानों को क्या मिला ?

उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2022 का बजट पेश किया है। जिसमे यू. पी. के वयस्कों, महिलाओं, गरीब किसानों, बेरोजगारों आदि सभी को लगभग काफ़ी कुछ मिला है। तो आइए हम जानते है कि इस बजट के माध्यम से वहां के किसानों को क्या फ़ायदा मिला ?

उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 के माध्यम से किसानों को फ़ायदा :

- सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली, पी.एम. कुसुम योजना, सोलर पैनल्स, लघु सिंचाई परियोजना

बजट में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली का प्रावधान है। इसके लिए किसानों को पी.एम. कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को मुफ़्त सोलर पैनल्स उपलब्ध कराए जाएंगे। सिंचाई की अवशेष परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ एक हज़ार करोड़ रुपए की लागत से लघु सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का विशेष प्रावधान भी इस बजट में है।

- भामाशाह भावस्थिरता कोश की स्थापना के लिए फंड

किसानों के लिए भामाशाह भावस्थिरता कोश की स्थापना के लिए फंड की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री जी ने पहले से ही धान, गेहूं, और अन्य फसलों के लिए एम.एस.पी. कला उपलब्ध कराई थी लेकिन आलू, टमाटर, प्याज, आदि फसलों में इस प्रकार की व्यवस्था नहीं थी जो कि इस बजट में कराई गई है।

- जैविक खेती

प्रदेश में अभी भी काफ़ी किसान जैविक खेती से जुड़े हुए हैं, जिनके लिए मुख्यमंत्री जी ने टेस्टिंग लैब के व्यवस्था की है। और अगले 5 वर्षों में संपूर्ण बुंदेलखंड खंड को जैविक खेती से जोड़ने का प्रावधान भी इस बजट में पेश किया गया है।

ये भी पढ़ें: जानिए क्या है नए ज़माने की खेती: प्रिसिजन फार्मिंग

- बीजों का वितरण

वर्ष 2021-2022 में 60.10 लाख क्विंटल बीजों का वितरण किया गया था और वर्ष 2022-2023 में इसकी मात्रा बढ़ाकर 60.20 लाख क्विंटल बीजों का वितरण किया जाएगा।

- नलकूप तथा लघु नहर

प्रदेश में 30,307 राजकीय नलकूपों तथा 252 लघु नहरों के माध्यम से मुफ़्त सिंचाई सुविधा की व्यवस्था की गई है।

- लघु सिंचाई परियोजना

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई परियोजना के लिए एक हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।

- उर्वरक का वितरण

वर्ष 2021-2022 में कृषकों के लिए 98.80 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया था तथा वर्ष 2022-2023 में 119.30 लाख मीट्रिक टन उर्वरक के वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

- सोलर पंपों की स्थापना

कृषकों को सिंचाई के लिए डीजल विद्युत के स्थान पर ऊर्जा प्रबंधन के तहत ऊर्जा संरक्षण के लिए कृषकों के लिए सोलर पंपों की स्थापना की जाएगी।

ये भी पढ़ें: शासन से अनुमति मिलने के बाद ही बेच सकते हैं बीज : जानें यूपी में कैसे मिलेगी बीज बेचने की अनुमति?

विपक्ष की ओर से बयान :

इस बजट पर विपक्ष की ओर से मायावती ने अपना बयान देते हुए कहा है कि, इस बजट से मुख्यमंत्री जी आम जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। उन्होनें आगे ट्वीट कर के कहा है कि "यूपी सरकार का बजट प्रथम दृष्टया वही घिसापिटा व अविश्वनीय तथा जनहित एवं जनकल्याण में भी खासकर प्रदेश में छाई हुई गरीबी, बेरोजगारी व गड्ढायुक्त बदहाल स्थिति के मामले में अंधे कुएं जैसा है, जिससे यहाँ के लोगों के दरिद्र जीवन से मुक्ति की संभावना लगातार क्षीण होती जा रही है।" उन्होंने आगे कहा है कि किसानों के लिए जो बड़े बड़े वादे किए गए थे, तथा जो बुनियादी कार्य प्राथमिकता के आधार पर करने थे वे कहां किए गए। 

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बीजेपी ने इतने बजट पेश किए है जिसमे केवल नंबर बढ़ाए गए है, इससे किसानों को कोई फायदा नही मिला है। बेरोजगारी और गरीबी अपनी चरम सीमा पर है। बजट के बारे में जो कुछ भी मुख्यमंत्री जी ने कहा है, उससे आम जनता और किसानों को कोई फायदा नही है। साथ ही वे कहते हैं उनके इन कामों से जनता का कोई फायदा नहीं होगा। वहीं यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी ने बजट प्रस्तुत करने के बाद अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि यह बजट 2022-2023 का है, जिससे यूपी की 25 करोड़ जनता का फायदा होगा और साथ ही यह बजट उत्तर प्रदेश के गरीब किसानों और नौजवानों की इच्छाओं को ध्यान में रख कर बनाया गया है। इसके अलावा उन्होनें कहा है कि यह बजट प्रदेश के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

किसान के खर्चो में कमी करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है सोलर एनर्जी पर निर्भरता

किसान के खर्चो में कमी करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है सोलर एनर्जी पर निर्भरता

खेती किसानी में बढ़ते हुए खर्चों के कारण किसानों की लागत एवं आमदनी में अंतर बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ सालों से देखा गया है कि खेती में लगने वाली लागत में बेतहासा वृद्धि हुई है, लेकिन उस अनुपात में खेती से होने वाली आमदनी में बढ़ोत्तरी नहीं देखी गई है। इसलिए सरकार समय-समय पर किसानों की आय को बढ़ाने के लिए प्रयास करती रहती है। इसी श्रृंखला में आज हम बताने जा रहे हैं सौर ऊर्जा यानी सोलर एनर्जी (Solar Energy) के बारे में, जो परंपरागत बिजली बचाने के साथ-साथ किसानों के खर्चों में लगाम लगाने में सहायक हो सकती है। इसके लिए किसानों को अपनी खेती को परंपरागत बिजली की जगह सोलर एनर्जी से प्राप्त बिजली में स्थानान्तरित करना होगा। किसान सिंचाई के साथ अन्य चीजों में सोलर बिजली का उपयोग कर सकते हैं। इससे एक तरफ तो सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही बिजली की खपत कम होगी, तो दूसरी तरफ बिजली का बिल न आने के कारण किसानों की आमदनी में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानि 'प्रधानमंत्री कुसुम योजना' (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthan Mahabhiyan - 'PM KUSUM Scheme') के नाम से एक योजना भी चलाई है, जिसमें सरकार किसानों को डीजल-पेट्रोल के पम्पों की जगह सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करती है।


ये भी पढ़ें:
भारत सरकार द्वारा लागू की गई किसानों के लिए महत्वपूर्ण योजनाएं (Important Agricultural schemes for farmers implemented by Government of India in Hindi)

क्या है प्रधानमंत्री कुसुम योजना?

इस योजना की घोषणा सबसे पहले पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की थी, जिसमें किसानों को सिंचाई का एक अच्छा माध्यम देने के लिए डीजल-पेट्रोल से चलने वाले पम्पों को सौर ऊर्जा से चलने वाले पम्पों से बदलने के लिए कहा गया था। इस योजना का उद्देश्य किसानों को पूरी तरह से सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा पर निर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के लिए चालू वित्त वर्ष में 34,422 करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है, जिसके तहत किसानों को सोलर पम्प लगाने पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सोलर पम्प खरीदने के लिए 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार प्रदान करेगी, जबकि 30 प्रतिशत राशि किसान बैंकों से ऋण के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। इस ऋण को किसानों को बैंकों को वापस करना होगा। बाकी बची हुई 10 प्रतिशत राशि का खर्च किसान को खुद वहन करना होगा। PM Kusum Yojna : Source: https://pmkusum.mnre.gov.in/landing.html

प्रधानमंत्री कुसुम योजना का उद्देश्य क्या है?

इस योजना का उद्देश्य किसानों को अपने खेतों में सोलर पैनल (Solar Panel) और सोलर पम्प (Solar Pump) लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके लिए सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार ऐसे राज्यों के किसानों को सोलर पंप या सोलर पैनल प्रदान करने की कोशिश कर रही है, जहां किसानों की, पानी की कमी की वजह से फसलें उजड़ जाती हैं, साथ ही किसान खुद के पैसों से सोलर पैनल लगवाने में समर्थ नहीं हैं। इन सोलर पैनलों से प्राप्त बिजली का उपयोग किसान सिंचाई के साथ-साथ घर के अन्य कार्यों के लिए भी कर सकते हैं। साथ ही अतिरिक्त बिजली सरकार को बेच सकते हैं, जिनसे किसानों को अतिरिक्त आमदनी हो सकती है।

इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किन-किन दस्तावेजों की जरुरत होती है?

इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आपको आधार कार्ड, मूल निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, किसान होने का सर्टिफिकेट, बैंक में खाता, जमीन का विवरण, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो की जरुरत पड़ेगी।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना से क्या लाभ हैं?

इस योजना में सोलर पैनल लगवाने पर किसान को लागत का मात्र 10 प्रतिशत ही भुगतान करना होता है। सोलर पैनल लगने के कारण सिंचाई के अलावा अतिरिक्त बिजली का उपयोग घर के अन्य कामों के लिए किया जा सकता है। जिस भूमि पर पानी की कमी के कारण अनाज नहीं उगाया जाता था उस पर अब अनाज उगाया जा सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी। इससे किसानों को आर्थिक तंगी से बचाया जा सकेगा जिससे किसानों की आत्महत्याओं में कमी लाई जा सकेगी।


ये भी पढ़ें:
पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण करने का दावा कर रहीं फर्जी वेबसाइट : नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एडवाइजरी
सोलर पैनल लगवाने के बाद बार-बार बिजली का बिल भरने की जरुरत नहीं पड़ेगी। इस योजना के तहत लगने वाले सोलर पैनलों से जो अतिरिक्त बिजली बनेगी, उसे किसान सरकार को बेचकर कुछ अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना से प्राप्त बिजली के उपयोग से परोक्ष रूप से किसान पर्यावरण को भी हानि नहीं पहुंचाते हैं।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना में आवेदन कैसे करें?

प्रधानमंत्री कुसुम योजना में आवेदन करने के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग आधिकारिक वेबसाइट हैं, जो सम्बंधित राज्य के कृषि एवं ऊर्जा मंत्रालय द्वारा चलाई जाती हैं। इच्छुक किसान अपने राज्य की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। अप्लाई करने के 90 दिनों के भीतर सहायता राशि मुहैया करवाकर सोलर पम्प चालू कर दिए जाते हैं।
अन्न के साथ किसान पैदा कर रहे ऊर्जा, बिना बिजली के खेतों तक पहुंच रहा पानी

अन्न के साथ किसान पैदा कर रहे ऊर्जा, बिना बिजली के खेतों तक पहुंच रहा पानी

क्या आप कभी ऐसा सोच सकते हैं, कि बिना बिजली कनेक्शन के खेतों तक पानी पहुंच जाए? जाहिर है, कि ये बात हर किसी को नामुमकिन लगेगी. आपको बता दें किसानों ने इसी नामुकिन सी बात को मुमकिन कर दिखाया है. आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश में एक विकासशील राज्य है. लेकिन वहन अभी भी इसे कई कृषि क्षेत्र हैं, जहां पर बिजली का कनेक्शन नहीं पहुंचा है. ऐसी स्थिति में कृषि क्षेत्रों के लिए एमपी सरकार की सोलर पंप योजना को काफी ज्यादा पसंद की जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में 20 हजार 6 सौ से ज्यादा सोलर पंप क्षेत्रों में स्थापित किये गये हैं. जिसके बाद एमपी के किसान सिर्फ अन्न ही नहीं बल्कि खेतों में उर्जा भी पैदा कर रहे हैं.

एमपी सरकार ने शुरू की योजना

मध्य प्रदेश की सिवराज सिंह चौहान की सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ी योजन की शुरुआत की है. इस योजना के तहत
किसानों के लिए सोलर पंप की सौगात दी है. सरकार की इस योजना के पीछे सिर्फ एक ही उद्देश्य है, कि किसान भाई बिजली कनेक्शन के बिना अपने खेतों की फसलों में सिंचाई कर सकें. बिजली की समस्या से राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्र के किसान परेशान हैं. बिजली ही एक मात्र ऐसा जरिया है, जिससे खेतों में पानी पहुंचाया जा सके. किसानों की इस समस्या को देखते हुए, सरकार ने नई योजना शुरू करके किसानों के लिए एक विकल्प तैयार कर दिया है. जिससे किसान खेतों में सोलर पंप की मदद सिंचाई करने का फायदा उठा रहे हैं.

बदल गयी सोलर पंप से तक़दीर

राज्य सरकार के मुताबिक 20 हजार 6 सौ से ज्यादा सोलर पंप खेतों में लगाये जा चुके हैं. वहीं सरकार का लक्ष्य 60 हजार सोलर पंप लगाने का है. सबसे अहम बात यह है कि, इस योजना का फायदा उन किसानों को सबसे ज्यादा मिल रहा है, जिनके नदी, तालाब, नलकूप या फिर अन्य स्रोत में पानी था, लेकिन उस पानी का इस्तेमाल करने के लिए बिजली नहीं मिल पा रही थी. जो भी किसान भाई सरकार की सोलर पंप वाली योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड भोपाल में अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा. रजिस्ट्रेशन के लिए 5 हजार रुपये की धनराशी निर्धारित की गयी है. ऐसे में अगर किसी किसान का रजिस्ट्रेशन रिजेक्ट होता है, तब किसान को पूरा अमाउंट लौटा दिया जाएगा.

सरकार देगी अनुदान

सोलर पंप के लिए सरकार की ओर से किसानों को अनुदान दिया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक एचपी डीसी समर्सिबल पंप के लिए किसानों को सिर्फ 19 हजार रूपये देने होंगे. जिसके माध्यम से उन्हें करीब 30 हजार का फायदा दिया जाएगा. बात दो एचपी डीसी सरफेस की करें तो, उसके लिए किसान को 23 हजार रुपये देने होंगे. दो एचपी डीसी समर्सिबल के लिए सिर्फ 25 हजार रुपये में किसान को सोलर पंप की सुविधा मिलेगी.

ये भी पढ़ें:
पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण करने का दावा कर रहीं फर्जी वेबसाइट : नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एडवाइजरी
तीन एचपी के लिए 36 हजार और 5 एचपी के लिए 72 हजार, तो वहीं 7.5 एचपी के लिए एक लाख 35 हजार रुपयों का भुगतान किसानों को करना होगा.

इस योजना के लिए पात्रता

  • मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना की पात्रता के लिए किसान आवेदक को एमपी का स्थाई निवासी होना जरूरी है.
  • आवेदक के पास किसान कार्ड भी होना जरूरी है.
  • आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, खेती योग्य जमीन के कागज, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज़ की फोटो के साथ आवेदक का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा.
  • एमपी के किसी भी क्षेत्र का किसान क्यों ना हो, वो मुख्यमंत्री किसान सोलर पंप योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकता है.

इन नियमों का जानना जरूरी, वरना नहीं मिलेगा सोलर पंप

  • आवेदक किसान सोलर पंप का इस्तेमाल सिर्फ सिंचाई के लिए ही कर सकता है.
  • सोलर पंप से निकले पानी को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता.
  • मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम से सोलर पंप की स्थापना के लिए सहमती लेनी जरूरी होगी.
  • जहां पर बिजली कनेक्शन नहीं है, यह योजना सिर्फ उन्हीं किसानों के लिए बनाई गयी है.
इस किसान की सिंचाई करने की तकनीक के बारे में जानकर आपके होश उड़ जाऐंगे

इस किसान की सिंचाई करने की तकनीक के बारे में जानकर आपके होश उड़ जाऐंगे

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) की रिपोर्ट के अनुसार, इस कमाल के मशीन को बनाने में हरजिंदर सिंह का हाथ है। उन्होंने इस मशीन पर सोलर पैनल लगा कर इसे पोर्टेबल बना दिया है। इस पूरी मशीन पर 24 सोलर पैनल लगे हुए हैं। भारत में किसान अब आधुनिक मशीनों की मदद से कृषि करने लगे हैं। इनमें बहुत सारे किसान ऐसे भी हैं, जो खेती के लिए आधुनिक मशीने विदेश से मंगाते हैं। तो वहीं बहुत से किसान भाई ऐसे भी हैं जो जुगाड़ से ऐसी आधुनिक मशीने बना लेते हैं, जिनके बारे में बड़े बड़े इंजीनियर भी नहीं सोच पाते। तो चलिए आज आपको एक ऐसी ही मशीन के बारे में बताते हैं जिसकी मदद से आप जहां चाहें वहां अपने खेत की सिंचाई कर सकते हैं।

मोबाइल सोलर प्लांट

मोबाइल सोलर प्लांट एक ऐसी मशीन है, जिसकी मदद से किसान भाई अपने खेतों में सहजता से सिंचाई कर सकते हैं। जो किसान पानी की पहुंच से दूर हैं अथवा फिर जहां ट्यूबवेल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस मशीन को चलाने हेतु अलग से बिजली की आवश्यकता नहीं पड़ती। क्योंकि, इस मशीन में सोलर पैनल लगे हुए होते हैं, जो सूरज की रौशनी से बिजली उत्पन्न करते हैं, जिससे ये मशीन चलती है।

इस अद्भुत कमाल को करने वाला शख्स कौन है

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, इस कमाल की मशीन को बनाने में हरजिंदर सिंह का हाथ है। उन्होंने इस मशीन पर सोलर पैनल लगा कर इसे पोर्टेबल बना दिया है। इस पूरे मशीन पर 24 सोलर पैनल लगे हुए हैं। सबसे विशेष बात यह है, कि इस मशीन को ट्रैक्टर के सहारे कहीं भी ले जाया जा सकता है। इस मशीन को सेट करने में केवल कुछ ही मिनट का वक्त लगता है। ये सिंचाई के लिए तैयार हो जाती है। इस मशीन के माध्यम से किसान दो हजार से पांच हजार लीटर पानी तक की सिंचाई बड़ी ही सुगमता से कर सकते हैं। ये भी पढ़े: भारत में लॉन्च हुए ये 7 दमदार नए ट्रैक्टर

इस तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ भारत नहीं जर्मनी तक होता है

हालाँकि, ऐसा नहीं है कि इस तरह की तकनीक का उपयोग सिर्फ भारत के किसान कर रहे हैं। जर्मनी में भी फलों की खेती करने वाले किसान इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोलर पैनल की सहायता से किसान ना केवल खेतों में सिंचाई कर रहे हैं, बल्कि पूरे खेत के लिए वो इन्हीं सोलर पैनलों से बिजली भी बना रहे हैं। धीरे-धीरे विश्वभर के किसान इस तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। साथ ही, नई-नई तकनीक की सहायता से अपनी खेती को बेहतर कर रहे हैं।
सोलर पैनल के उपयोग से खेती की उन्नति पर क्या प्रभाव पड़ता है, इससे क्या-क्या लाभ मिलते हैं

सोलर पैनल के उपयोग से खेती की उन्नति पर क्या प्रभाव पड़ता है, इससे क्या-क्या लाभ मिलते हैं

सोलर पैनल के इस्तेमाल से किसान सुगम तरीके से अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं। भारत सरकार सोलर पैनल लगाने पर कृषकों को भारी अनुदान भी प्रदान कर रही है। हमारे भारत के किसान कृषि के लिए अनियमित मानसून एवं अपर्याप्त विद्युत प्रणालियों पर आश्रित रहते हैं। इन चुनौतियों की वजह से किसानों की फसल उत्पादन क्षमता में गिरावट आती है। भारतीय किसानों के समीप भारत की उष्णकटिबंधीय जलवायु के रूप में एक मूल्यवान सोलर संपत्ति है, जो कृषकों को खेतों में सौर पैनल स्थापित कर ऊर्जा एवं पानी की जरूरतों को पूरा करने का अवसर प्रदान करती है। सौर पैनलों का उपयोग भारत के कृषि परिदृश्य को देखते हुए इसे एक बेहतर उपयोग के तौर पर लिया जा सकता है। फिलहाल, भारत में सौर पैनलों की काफी ज्यादा मांग भी है और भारत सरकार इसके इंस्टालेशन पर सब्सिड़ी भी उपलब्ध करा रही है।

ऊर्जा पर निर्भरता को कम करने में सहयोगी

भारत के ग्रामीण इलाकों में आम तौर पर बिजली की कमी अथवा आपूर्ति सही वक्त पर नहीं हो पाती है। ऐसी स्थिति में खेतों पर सौर पैनल स्थापित करके, किसान अपनी स्वयं की बिजली पैदा कर सकते हैं, जिससे सिंचाई, मशीनरी एवं अन्य कृषि कार्यों के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे किसानों की ग्रिड पर निर्भरता काफी कम होती है। साथ ही, उत्पादकता में भी काफी सुधार आऐगा। ये भी देखें: पंजाब सरकार सिचाईं पर करेगी खर्च कम, लेगी सौर ऊर्जा की मदद

सौर ऊर्जा से सिंचाई सुगमता से की जा सकती है

खेती किसानी पूर्णतय पानी पर आश्रित होती हैं। वहीं, सौर ऊर्जा के जरिए से फसलों में सिंचाई के लिए कुओं एवं अन्य जल स्रोतों से पानी पंप करने में सहयोग मिलता है। सौर ऊर्जा से संचालित पंप भरपूर मात्रा में सूर्य की रोशनी का इस्तेमाल करके दिन के दौरान कार्य कर सकते हैं, जो पौधों की सिंचाई की आवश्यकता को पूर्ण कर सकता है।

अत्यधिक पैसों की बर्बादी पर रोकथाम

साधारण बिजली के मुकाबले में सोलर पैनल पर काफी कम खर्च आता है। एक बार सौर पैनल स्थापित हो जाने के उपरांत, उनकी परिचालन एवं रखरखाव लागत अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे किसानों को बाकी महत्वपूर्ण जरूरतों के लिए धन की बचत हो पाती है। खेती के अतिरिक्त सौर ऊर्जा किसानों को आय का एक अतिरिक्त जरिया प्रदान कर सकती है। किसान भाई अतिरिक्त बिजली पैदा करके इसे नेट मीटरिंग के जरिए से ग्रिड को वापस बेच सकते हैं, जिससे इनकी आमदनी भी होगी। ये भी देखें: जाने खेती के साथ-साथ बिजली उत्पादन करते हुए कैसे कमा रहे हैं किसान ज्यादा आमदनी

यह पूर्णतय रिमोट एक्सेस है

सौर ऊर्जा से चलने वाली प्रौद्योगिकियों को डिजिटल टूल एवं सेंसर के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे किसानों को अपने खेतों की दूर से निगरानी एवं प्रबंधन करने में सुगमता होती है। इसमें मिट्टी की नमी, मौसम की स्थिति और फसल स्वास्थ्य की निगरानी करना, निर्णय लेने में सक्षम बनाना और संसाधन उपयोग को अनुकूलित करना शम्मिलित है।

ग्रामीण विकास में काफी सहयोगी है

खेतों पर सौर पैनल स्थापित करने से इसके रखरखाव एवं मरम्मत के लिए स्थानीय रोजगार उत्पन्न होते हैं। इससे ग्रामीण समुदायों में आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलता है। भारत सरकार भी लोगों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन, सब्सिडी, योजनाएं एवं नीतियां प्रदान करती रहती है। कृषक भाई भी इन योजनाओं का फायदा उठाते हैं।